अभिशाप…

कट्टा ब्लॉगर्स कट्टा

किसिके हवस की आग ना बुझा सकी
तो उसे जला दिया जाता है
जब भी बात तेरे हवस की आती है
तो तेरा सो कॉल्ड धरम कहा चला जाता है

उसे तो देवी समान माना करते हो तुम
फिर क्यु उसे ईस्तेमाल करणे को सामान बनाया जाता है
माँ के घर वो पराया धन केहेलाती
वही पती के घर पराये घर की जतलाती है

सदीयो से उसके सुरक्षा का जिम्मा
बाप भाई पती और बेटे के सिर थमाया गया
पैरो मे पायल देकर उसे गुलाम तो बना लिया
ताकी जब भी वो आझाद होना चाहे
पायल की झनकार उसके जाने का
उसके दिवरो में कैद होणे का एहेसास दिलाती रहे

क्या उसके शरीर से इतनी मादकता बेहेती है
जो तू हर नुक्कड गली चौराहे तक की मंदिर मे भी
उसे बेरेहमी से धर दबोच कर खाना चाहे
सोच कैसे लगता होगा जब, कई हवस के हैवान
एक साथ उसके शरीर में घुसना चाहे

मासुम होती है लडकी
जब भी कोई करीब से चुमे
तो उसे मोहोबत समज लेती है
इसी मासुमियत को ठग कर
अपनेही घरसे धहेज के संग
खरीदी जाती है लडकी

नारी का अभिशाप तो तू जन्म से साथ लाई है
तेरे ही शरीर से जन्मे ये नर
नारी को बेचारी कमजोर अबला कहे है
सदियोसे ही इन हैवांनो ने तुझपर कई बार जुल्म ढाये है

भरी मेहेंफिल में तेरे पांच पतियो की मौजुदगी होते हुए
तुझे निर्वस्त्र किया जा रहा था
वही तेरा भाई केहेलाने वाला भगवान श्रीकृष्ण
हैवांनो को मारणे के बजाय
बडे शोक की बात है
तुझे साडीया पेहेनाने मे मग्रूर था

ऐ नारी ‘तेरी ये भ्रूण हत्या आजकी नहीं है
द्वापारयुग से लेकर कलयुग तक तुझे बस दफणाया गया
तेरे सात बार जन्मने पर भी तुझे नहि
आठवी बार जन्मे पुत्र श्रीकृष्ण को ही बचाया गया

ये न करो वो न करो, यहा ना जाओ वहा ना जाओ की
ये लक्ष्मण रेखा आज भी तेरे पैरो तले खिची जाती है
कभी तू बेजान सा खिलोना
तो कभी खुली तिजोरी केहेलाती है

सतयुग में रावण अहंकारी है
इंसानियत बेशर्मी हया उसमे तब भी बाकी थी
पुरुषोत्तम केहेलाने वाला असली हैवान तो राम है
सीता के चरित्र को उछाल कर
शुद्धी की अग्निपरीक्षा तो उसिने ली थी

–शितल पाटील

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